तिलक का महत्व , प्रकार और सही विधि | जानें तिलक लगाने के सही नियम

तिलक: महत्व, प्रकार और सही विधि | जानें तिलक लगाने के सही नियम

तिलक का महत्व

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य, मांगलिक अवसर, पूजा, व्रत या त्योहार में तिलक लगाने की परंपरा अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। तिलक का अर्थ है – मस्तक पर लगाया जाने वाला शुभ चिन्ह। इसे दोनों भौहों के बीच, आज्ञा चक्र (अजना चक्र) पर लगाया जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, तिलक लगाने से व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, मन शांत रहता है और बौद्धिक क्षमता में वृद्धि होती है। संत, महात्मा, योगी और देवी-देवताओं के चित्रों में भी तिलक का विशेष स्थान देखा जाता है।

तिलक केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी लाभदायक माना जाता है। यह मानसिक एकाग्रता को बढ़ाता है, मस्तिष्क को ठंडा रखता है और आत्मविश्वास बढ़ाने में सहायक होता है। तिलक लगाने से जीवन में यश, सम्मान और सकारात्मकता आती है तथा पापों का नाश होता है।

तिलक लगाने के लिए सही उंगली

तिलक लगाते समय सही उंगली का चयन करना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। गलत उंगली से तिलक लगाने से नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए तिलक हमेशा निम्नलिखित उंगलियों से ही लगाना चाहिए:

  1. अनामिका (रिंग फिंगर): यह उंगली सूर्य और ब्रह्मांडीय ऊर्जा की प्रतीक होती है। इस उंगली से तिलक लगाने से तेजस्विता, आत्मविश्वास और प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है।
  2. अंगूठा: अंगूठे से तिलक लगाने से व्यक्ति के मान-सम्मान और सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है।
  3. तर्जनी (इंडेक्स फिंगर): विजय प्राप्ति के लिए इस उंगली से तिलक लगाया जाता है। यह उंगली गुरु ग्रह से संबंधित होती है, जिससे ज्ञान और आध्यात्मिक शक्ति में वृद्धि होती है।
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तिलक के विभिन्न प्रकार और उनके लाभ

तिलक विभिन्न रंगों और सामग्रियों से बनाया जाता है, जो अलग-अलग धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व रखते हैं:

  1. चंदन (सफेद तिलक): यह मस्तिष्क को शीतलता प्रदान करता है, मानसिक शांति देता है और सकारात्मकता को बढ़ाता है।
  2. कुमकुम (लाल तिलक): यह ऊर्जा, शक्ति और सौभाग्य का प्रतीक है। इसे देवी लक्ष्मी और पार्वती की कृपा प्राप्ति के लिए लगाया जाता है।
  3. भभूति (राख का तिलक): यह वैराग्य, मोहमाया से दूर रहने और शिवभक्ति का प्रतीक होता है। इसे शिव भक्त अपने माथे पर लगाते हैं।
  4. हल्दी (पीला तिलक): यह भगवान विष्णु और गणेश जी को समर्पित होता है। इसे लगाने से पापों से मुक्ति मिलती है और बिगड़े कार्य सफल होते हैं।

तिलक लगाने के विभिन्न स्थान और उनके महत्व

तिलक सिर्फ मस्तक पर ही नहीं बल्कि शरीर के अन्य महत्वपूर्ण भागों पर भी लगाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन स्थानों पर तिलक लगाने से विभिन्न प्रकार के आध्यात्मिक और स्वास्थ्य लाभ होते हैं:

1. गले (कंठ) पर तिलक लगाने का महत्व

गले का संबंध वाणी और मंगल ग्रह से होता है। गले में तिलक लगाने से:

  • वाणी में मिठास और प्रभावशाली शक्ति आती है।
  • व्यक्ति की संवाद कला में सुधार होता है।
  • सांसों की गति संतुलित रहती है, जिससे मानसिक शांति मिलती है।

2. छाती (हृदय) पर तिलक लगाने का महत्व

छाती में हृदय स्थित होता है, जो प्रेम, भक्ति और ईश्वर का वास माना जाता है। छाती पर तिलक लगाने से:

  • हृदय की नकारात्मक भावनाएं जैसे भय, क्रोध, लालच और अशांति दूर होती हैं।
  • आत्मिक शक्ति और साहस में वृद्धि होती है।
  • हृदय में भक्ति और दया की भावना जाग्रत होती है।
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3. भुजाओं (बाहों) पर तिलक लगाने का महत्व

भुजा का संबंध शुक्र ग्रह से होता है। भुजा पर तिलक लगाने से:

  • बल, साहस और आत्मरक्षा की शक्ति बढ़ती है।
  • अगर किसी व्यक्ति का शुक्र ग्रह कमजोर होता है, तो उसे भुजा पर तिलक लगाने से लाभ होता है।
  • पुरुषार्थ और कर्म करने की शक्ति मिलती है।

तिलक लगाने के वैज्ञानिक लाभ

तिलक लगाने के पीछे आध्यात्मिक और धार्मिक कारणों के साथ-साथ वैज्ञानिक कारण भी हैं:

  • माथे के बीच में तिलक लगाने से ‘पीनियल ग्लैंड’ (Pineal Gland) सक्रिय होती है, जिससे एकाग्रता और स्मरण शक्ति बढ़ती है।
  • यह मन को शांत करता है और अनावश्यक तनाव को कम करता है।
  • माथे पर तिलक लगाने से सिरदर्द और माइग्रेन की समस्या में भी राहत मिलती है।
  • तिलक लगाने से शरीर की ऊर्जा संतुलित रहती है और शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है।

तिलक लगाने की सही विधि

तिलक लगाने की विधि को सही ढंग से अपनाने से इसके अधिक लाभ प्राप्त होते हैं:

  1. पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. तिलक को अनामिका, अंगूठा या तर्जनी उंगली से लगाएं।
  3. तिलक लगाते समय भगवान का नाम जपें।
  4. यदि संभव हो, तो तिलक को चंदन, कुमकुम या भभूति से तैयार करें।

निष्कर्ष

तिलक केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि मानसिक, आध्यात्मिक और वैज्ञानिक लाभों से भरपूर एक परंपरा है। इसे सही उंगली से लगाने और विभिन्न स्थानों पर लगाने से विशेष लाभ प्राप्त होते हैं।

तिलक हमारे शरीर की ऊर्जा को संतुलित करता है, मस्तिष्क को ठंडा रखता है और सकारात्मकता लाने में सहायक होता है। यह केवल सौंदर्य का प्रतीक नहीं, बल्कि आत्मिक शक्ति, यश, कीर्ति और उन्नति का मार्ग भी प्रशस्त करता है।

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अतः तिलक को अपनी दिनचर्या और धार्मिक जीवन का अभिन्न अंग बनाएं और इसके दिव्य लाभ प्राप्त करें।

प्रो. शिव चन्द्र झा, के.एस.डी.एस.यू., दरभंगा में धर्म शास्त्र के प्रख्यात प्रोफेसर रहे हैं। उनके पास शिक्षण का 40 से अधिक वर्षों का अनुभव है। उन्होंने Sanskrit भाषा पर गहन शोध किया है और प्राचीन पांडुलिपियों को पढ़ने में कुशलता रखते हैं।