Jha Shiv

प्रो. शिव चन्द्र झा, के.एस.डी.एस.यू., दरभंगा में धर्म शास्त्र के प्रख्यात प्रोफेसर रहे हैं। उनके पास शिक्षण का 40 से अधिक वर्षों का अनुभव है। उन्होंने Sanskrit भाषा पर गहन शोध किया है और प्राचीन पांडुलिपियों को पढ़ने में कुशलता रखते हैं।

वेदों में क्या लिखा है

वेदों में क्या लिखा है

वेद भारतीय संस्कृति के वे ग्रन्थ हैं, जिनमे ज्योतिष, गणित, विज्ञान, धर्म, ओषधि, प्रकृति, खगोल शास्त्र आदि लगभग सभी विषयों से सम्बंधित ज्ञान का भंडार भरा पड़ा है।

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कर्ज मुक्ति मंत्र

कर्ज मुक्ति मंत्र

कर्ज से बढ़कर कष्टप्रद कोई स्थिति नहीं होती। अगर आप भी कर्ज के बोझ से परेशान हैं तो इस मंत्रों का प्रयोग अवश्य करें। इससे ना सिर्फ कर्ज से मुक्ति मिलेगी बल्कि जीवन में कभी कर्ज लेने की स्थिति ही निर्मित नहीं होगी।

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भगवान कितने प्रकार के होते हैं ?

भगवान कितने प्रकार के होते हैं ?

भगवान कितने प्रकार के होते हैं, यह प्रश्न शायद संसार का सबसे बड़ा प्रश्न है | लोग भ्रम में हैं कोई कहता है ईश्वर सगुण है कोई उसे निर्गुण कहता है पर दोनों ही नहीं जानते. परमात्मा निराकार भी है और साकार भी है. एक दृष्टि अधूरी है |

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घर को नज़र से बचाने के उपाय

घर को नज़र से बचाने के उपाय

नज़र दोष एक ऐसा अदृश्य अवरोध है जो व्यक्ति की सकारात्मक ऊर्जा को ढक देता है। इसके कारण व्यक्ति अपने गुणों और क्षमताओं को पहचान नहीं पाता। यह उन लोगों की ओर से आती है, जिनमें जलन और इर्ष्या का भाव होता है।

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पत्नी प्राप्ति मंत्र

पत्नी प्राप्ति मंत्र

भारतीय संस्कृति और शास्त्रों के अनुसार अच्छे वर और वधु प्राप्त करने के लिए प्राय: सभी भगवान शिव तथा माता पार्वती की पूजा करते है | इसमें लड़कियाँ सुयोग्य वर के लिए माता पार्वती और भगवान शिव कि उपासना करती है तो लड़के सुलक्षणा पत्नी हेतु भगवान शिव उपासना करते है |

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दिसंबर 2024 के व्रत-त्योहारों की पूरी डिटेल

दिसंबर 2024 के व्रत-त्योहारों की पूरी डिटेल

दिसंबर 2024 का महीना त्योहारों और व्रतों के लिहाज से बेहद खास रहने वाला है। इस महीने में कई प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव मनाए जाएंगे। साथ ही, दिसंबर से खर मास की भी शुरुआत होगी,

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जनेऊ क्यों पहनते हैं

जनेऊ क्यों पहनते हैं और इसके फायदे क्या हैं?

जनेऊ को उपवीत, यज्ञसूत्र, व्रतबन्ध, बलबन्ध, मोनीबन्ध और ब्रह्मसूत्र भी कहते हैं। इसे उपनयन संस्कार भी कहते हैं। ‘उपनयन’ का अर्थ है, ‘पास या सन्निकट ले जाना।

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अहोई अष्टमी व्रत

पुत्र प्राप्ति के लिए अहोई अष्टमी व्रत की परम्परा

अहोई अष्टमी का व्रत कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन किया जाता है। पुत्रवती महिलाओं के लिए यह व्रत अत्यन्त महत्वपूर्ण है। माताएं अहोई अष्टमी के व्रत में दिन भर उपवास रखती हैं

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रविवार व्रत कथा , विधि एवं आरती

रविवार व्रत कथा , विधि एवं आरती

रविवार व्रत कथा – इससे सभी पापों का नाश होता है। इससे मनुष्य को धन, यश, मान-सम्मान तथा आरोग्य प्राप्त होता है।इस व्रत के करने से स्त्रियों का बाँझपन दूर होता है। इस व्रत के करने से मनुष्य को मोक्ष प्राप्त होता है |

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