
कनकधारा स्त्रोत हिंदी अर्थ सहित
भगवती कनकधारा महालक्ष्मी स्तोत्र की रचना श्री शंकराचार्य जी ने की थी।उनके इस स्तुति से प्रसन्न होकर माता लक्ष्मी जी ने स्वर्ण के आँवलों की वर्षा कराई थी इसलिए इसे कनकधारा स्तोत्र कहते हैं।
भगवती कनकधारा महालक्ष्मी स्तोत्र की रचना श्री शंकराचार्य जी ने की थी।उनके इस स्तुति से प्रसन्न होकर माता लक्ष्मी जी ने स्वर्ण के आँवलों की वर्षा कराई थी इसलिए इसे कनकधारा स्तोत्र कहते हैं।
कार्तिक पूर्णिमा का पर्व 18 नवंबर 2024 (सोमवार) को मनाया जाएगा। इस दिन का हिंदू धर्म में अत्यंत महत्व है और इसे दीपदान, गंगा स्नान, और दान-पुण्य के लिए विशेष माना जाता है।
नवंबर 2024 का हिंदू कैलेंडर व्रत-त्योहार और शुभ मुहूर्त से भरपूर है। इस माह में छठ पूजा, भाई दूज और देवउठनी एकादशी जैसे महत्वपूर्ण पर्व मनाए जाते हैं। इसके अलावा गोपाष्टमी, तुलसी विवाह, कार्तिक पूर्णिमा और उत्पन्ना एकादशी जैसे अन्य त्योहारों का भी विशेष महत्व है।
शंख सदैव से ही सनातन संस्कृति के अनेक प्रतीकों में से एक प्रतीक रहा हैं । प्राचीन काल में शंख सब घरों में होता था। इसे दैनिक पूजा-अर्चना में स्थान दिया गया हैं।
बीमार व्यक्ति चाहता है कि वह और उसके परिवार के सदस्य आरोग्य को प्राप्त करें अर्थात निरोगी बने रहे । लेकिन वर्तमान समय के रहन सहन, खान-पान , शरीरिक श्रम की कमी के कारण लोगो को रोग बहुत जल्दी घेर लेते है ।
किसी भी व्यक्ति या वस्तु को नजर लग जाना और उसका व्यक्ति या वस्तु पर बुरा प्रभाव पड़ना नजर बाधा कहलाता हैं, यदि आपके घर को, आपके वाहन या किसी वस्तु को किसी की नजर लग गई हैं और नजर लगने से ही आपके घर में या घर की किसी वस्तु में लगातार कोई समस्या उत्पन्न हो रही हैं |
खाटू श्याम जी को “श्री श्याम” के नाम से भी जाना जाता है, और वे भक्तों के लिए कलियुग के साक्षात देवता माने जाते हैं। उनकी महिमा इतनी अलौकिक है
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर मनाया जाने वाला यह पर्व आंवला वृक्ष की पूजा को समर्पित है। धार्मिक ग्रंथों में आंवला वृक्ष को विशेष महत्व दिया गया है और इसे पवित्र एवं अक्षय माना गया है। इस दिन आंवला वृक्ष की पूजा करके भक्त दीर्घायु, स्वस्थ एवं सुखी जीवन की कामना करते हैं।
नासा ने ब्रह्मांड में एक बहुत बड़े जलाशय की खोज की है, जो पृथ्वी के महासागरों से 140 खरब गुना ज्यादा पानी रखता है। यह जलाशय 12 बिलियन प्रकाश-वर्ष दूर स्थित है। इस खोज ने कई लोगों को हैरान कर दिया, क्योंकि यह वही ‘भवसागर’ हो सकता है जिसे हमारे धार्मिक ग्रंथों में उल्लेखित किया गया है।
वेद भारतीय संस्कृति और धर्म का प्राचीनतम और अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रंथ माने जाते हैं। वेदों का महत्व केवल धार्मिक दृष्टिकोण से नहीं बल्कि सांस्कृतिक, दार्शनिक, वैज्ञानिक, और आध्यात्मिक दृष्टि से भी अत्यधिक है।