होलाष्टक के आठ दिनों को ज्योतिषीय दृष्टिकोण से अशुभ माना जाता है। इस दौरान विशेष रूप से मंगल और शनि जैसे ग्रहों की स्थिति के कारण नकारात्मक ऊर्जा का संचार होने की संभावना अधिक रहती है। इसलिए इस समय कोई नया या शुभ कार्य करने की मनाही होती है।
एक पुरानी मान्यता के अनुसार, होलाष्टक का संबंध राक्षसी शक्तियों से जुड़ा हुआ है। इसे असत्य और अंधकार का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान राक्षसों का वर्चस्व रहता है, जिससे घर में नकारात्मकता और अशांति बढ़ सकती है।
होलाष्टक में वर्जित कार्य
होलाष्टक के दौरान निम्नलिखित कार्यों को करना वर्जित माना गया है:
- 16 संस्कारों पर रोक: विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण, मुंडन, उपनयन संस्कार आदि।
- नए मकान, चल-अचल संपत्ति, गहने और वाहन की खरीदारी नहीं करनी चाहिए।
- मकान निर्माण प्रारंभ नहीं करना चाहिए।
- हवन और यज्ञ करना वर्जित होता है।
- अशुद्ध या तामसिक भोजन से बचना चाहिए (मांसाहार, शराब, अशुद्ध पदार्थों का सेवन वर्जित)।
- नौकरी बदलना या नई नौकरी ज्वाइन करना अशुभ माना जाता है।
होलाष्टक में करने योग्य कार्य
होलाष्टक के दौरान कुछ शुभ कार्य करने से नकारात्मक प्रभाव को कम किया जा सकता है:
- दान करें: अन्न, धन और आवश्यक वस्तुओं का दान करने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
- हनुमान चालीसा और महामृत्युंजय मंत्र का जप करें: इससे जीवन के संकट दूर होते हैं और हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है।
- नियमित पूजा-पाठ करें: भगवान का स्मरण और भजन करने से शुभ फल मिलते हैं।
- श्रीसूक्त व मंगल ऋण मोचन स्त्रोत का पाठ करें: आर्थिक संकट समाप्त होकर कर्ज से मुक्ति मिलती है।
- भगवान नृसिंह और हनुमानजी की पूजा करें।
- लड्डू गोपाल की पूजा करें: संतान गोपाल मंत्र जाप या गोपाल सहस्त्र नाम पाठ करवा कर अंत में घी-मिश्री से हवन करें, इससे शीघ्र संतान प्राप्ति होती है।
- व्रत और दान करें: इससे जीवन के कष्टों से मुक्ति मिलती है।
- महामृत्युंजय मंत्र का अनुष्ठान करें: रोगों से बचाव के लिए।
- विजय प्राप्ति के लिए: आदित्यहृदय स्त्रोत, सुंदरकांड या बगलामुखी मंत्र का जाप करें।
- परिवार की समृद्धि के लिए: रामरक्षा स्तोत्र, हनुमान चालीसा और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें।
- अपार धन-संपदा के लिए: गुड़, कनेर के पुष्प, हल्दी की गांठ और पीली सरसों से हवन करें।
- करियर में सफलता के लिए: जौ, तिल और शक्कर से हवन करें।
- कन्या विवाह हेतु: कात्यायनी मंत्रों का जाप करें।
- सौभाग्य प्राप्ति के लिए: चावल, घी और केसर से हवन करें।
- बच्चों की पढ़ाई में रुचि बढ़ाने के लिए: गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करें और मोदक-दूर्वा से हवन करें।
- नवग्रह की कृपा प्राप्ति के लिए: भगवान शिव का पंचामृत अभिषेक करें।
होलाष्टक: डरावना काल क्यों?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, होलाष्टक के आठ दिन बहुत डरावने माने जाते हैं, क्योंकि इस दौरान ग्रहों का स्वभाव उग्र रहता है। इससे जीवन में कई तरह के बदलाव और संघर्ष बढ़ जाते हैं। शुभ कार्यों पर रोक लगने का मुख्य कारण यही है कि इस समय किए गए कार्यों का प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
निष्कर्ष
होलाष्टक आठ दिनों का एक विशेष समय है, जिसमें नए कार्यों से बचना और धार्मिक अनुष्ठान करना अधिक लाभकारी माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान किए गए उपाय व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं और कठिनाइयों को दूर कर सकते हैं।
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