
शंख की उत्पत्ति कैसे हुई ?
शंख सदैव से ही सनातन संस्कृति के अनेक प्रतीकों में से एक प्रतीक रहा हैं । प्राचीन काल में शंख सब घरों में होता था। इसे दैनिक पूजा-अर्चना में स्थान दिया गया हैं।
शंख सदैव से ही सनातन संस्कृति के अनेक प्रतीकों में से एक प्रतीक रहा हैं । प्राचीन काल में शंख सब घरों में होता था। इसे दैनिक पूजा-अर्चना में स्थान दिया गया हैं।
बीमार व्यक्ति चाहता है कि वह और उसके परिवार के सदस्य आरोग्य को प्राप्त करें अर्थात निरोगी बने रहे । लेकिन वर्तमान समय के रहन सहन, खान-पान , शरीरिक श्रम की कमी के कारण लोगो को रोग बहुत जल्दी घेर लेते है ।
किसी भी व्यक्ति या वस्तु को नजर लग जाना और उसका व्यक्ति या वस्तु पर बुरा प्रभाव पड़ना नजर बाधा कहलाता हैं, यदि आपके घर को, आपके वाहन या किसी वस्तु को किसी की नजर लग गई हैं और नजर लगने से ही आपके घर में या घर की किसी वस्तु में लगातार कोई समस्या उत्पन्न हो रही हैं |
खाटू श्याम जी को “श्री श्याम” के नाम से भी जाना जाता है, और वे भक्तों के लिए कलियुग के साक्षात देवता माने जाते हैं। उनकी महिमा इतनी अलौकिक है
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर मनाया जाने वाला यह पर्व आंवला वृक्ष की पूजा को समर्पित है। धार्मिक ग्रंथों में आंवला वृक्ष को विशेष महत्व दिया गया है और इसे पवित्र एवं अक्षय माना गया है। इस दिन आंवला वृक्ष की पूजा करके भक्त दीर्घायु, स्वस्थ एवं सुखी जीवन की कामना करते हैं।
नासा ने ब्रह्मांड में एक बहुत बड़े जलाशय की खोज की है, जो पृथ्वी के महासागरों से 140 खरब गुना ज्यादा पानी रखता है। यह जलाशय 12 बिलियन प्रकाश-वर्ष दूर स्थित है। इस खोज ने कई लोगों को हैरान कर दिया, क्योंकि यह वही ‘भवसागर’ हो सकता है जिसे हमारे धार्मिक ग्रंथों में उल्लेखित किया गया है।
वेद भारतीय संस्कृति और धर्म का प्राचीनतम और अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रंथ माने जाते हैं। वेदों का महत्व केवल धार्मिक दृष्टिकोण से नहीं बल्कि सांस्कृतिक, दार्शनिक, वैज्ञानिक, और आध्यात्मिक दृष्टि से भी अत्यधिक है।
जागरूक स्वप्न (Lucid Dreaming) क्या है? हिंदू पुराणों में जागरूक स्वप्न के ये उदाहरण दिखाते हैं कि स्वप्नों का आध्यात्मिक
कुछ महत्त्वपूर्ण सपने और उनके अर्थ -स्वप्नों का विश्लेषण प्राचीन भारतीय और आधुनिक मनोविज्ञान दोनों में महत्वपूर्ण माना गया है। विभिन्न सपने हमारे अवचेतन मन की अभिव्यक्तियां होते हैं और ये हमारे जीवन के विभिन्न पहलुओं के बारे में संकेत देते हैं।
खाटू श्याम जी की कथा और उनकी पूजा की प्रथा भारत की आध्यात्मिकता में गहरी छाप छोड़ती है। खाटू श्याम जी का संबंध विशेष रूप से भक्तों की निष्ठा, विश्वास और उनसे मिलने वाली कृपा से जुड़ा है।