शिवलिंग पर दूध क्यों चढ़ाया जाता है ?

शिवलिंग पर दूध क्यों चढ़ाया जाता है ?

भगवान शिव के शिवलिंग पर दूध चढ़ाने की प्रथा का एक विशेष धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व है। सावन के महीने में यह प्रथा विशेष रूप से प्रचलित है, और इसके पीछे कई कारण और मान्यताएँ हैं। आइए इस परंपरा के धार्मिक और वैज्ञानिक पहलुओं को विस्तार से समझें।

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वेदों में क्या लिखा है

वेदों में क्या लिखा है

वेद भारतीय संस्कृति के वे ग्रन्थ हैं, जिनमे ज्योतिष, गणित, विज्ञान, धर्म, ओषधि, प्रकृति, खगोल शास्त्र आदि लगभग सभी विषयों से सम्बंधित ज्ञान का भंडार भरा पड़ा है।

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कर्ज मुक्ति मंत्र

कर्ज मुक्ति मंत्र

कर्ज से बढ़कर कष्टप्रद कोई स्थिति नहीं होती। अगर आप भी कर्ज के बोझ से परेशान हैं तो इस मंत्रों का प्रयोग अवश्य करें। इससे ना सिर्फ कर्ज से मुक्ति मिलेगी बल्कि जीवन में कभी कर्ज लेने की स्थिति ही निर्मित नहीं होगी।

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भगवान कितने प्रकार के होते हैं ?

भगवान कितने प्रकार के होते हैं ?

भगवान कितने प्रकार के होते हैं, यह प्रश्न शायद संसार का सबसे बड़ा प्रश्न है | लोग भ्रम में हैं कोई कहता है ईश्वर सगुण है कोई उसे निर्गुण कहता है पर दोनों ही नहीं जानते. परमात्मा निराकार भी है और साकार भी है. एक दृष्टि अधूरी है |

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घर को नज़र से बचाने के उपाय

घर को नज़र से बचाने के उपाय

नज़र दोष एक ऐसा अदृश्य अवरोध है जो व्यक्ति की सकारात्मक ऊर्जा को ढक देता है। इसके कारण व्यक्ति अपने गुणों और क्षमताओं को पहचान नहीं पाता। यह उन लोगों की ओर से आती है, जिनमें जलन और इर्ष्या का भाव होता है।

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पत्नी प्राप्ति मंत्र

पत्नी प्राप्ति मंत्र

भारतीय संस्कृति और शास्त्रों के अनुसार अच्छे वर और वधु प्राप्त करने के लिए प्राय: सभी भगवान शिव तथा माता पार्वती की पूजा करते है | इसमें लड़कियाँ सुयोग्य वर के लिए माता पार्वती और भगवान शिव कि उपासना करती है तो लड़के सुलक्षणा पत्नी हेतु भगवान शिव उपासना करते है |

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जनेऊ क्यों पहनते हैं

जनेऊ क्यों पहनते हैं और इसके फायदे क्या हैं?

जनेऊ को उपवीत, यज्ञसूत्र, व्रतबन्ध, बलबन्ध, मोनीबन्ध और ब्रह्मसूत्र भी कहते हैं। इसे उपनयन संस्कार भी कहते हैं। ‘उपनयन’ का अर्थ है, ‘पास या सन्निकट ले जाना।

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कनकधारा स्त्रोत हिंदी अर्थ सहित

कनकधारा स्त्रोत हिंदी अर्थ सहित

भगवती कनकधारा महालक्ष्मी स्तोत्र की रचना श्री शंकराचार्य जी ने की थी।उनके इस स्तुति से प्रसन्न होकर माता लक्ष्मी जी ने स्वर्ण के आँवलों की वर्षा कराई थी इसलिए इसे कनकधारा स्तोत्र कहते हैं।

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कार्तिक पूर्णिमा 2024

कार्तिक पूर्णिमा 2024

कार्तिक पूर्णिमा का पर्व 18 नवंबर 2024 (सोमवार) को मनाया जाएगा। इस दिन का हिंदू धर्म में अत्यंत महत्व है और इसे दीपदान, गंगा स्नान, और दान-पुण्य के लिए विशेष माना जाता है।

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